EMI में छूट के बावजूद ब्याज वसूली पर SC ने वित्त मंत्रालय से मांगा जवाब

EMI स्थगित पर ब्याज में छूट क्यों नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने बहस्पतिवार को मोरटेरियम के दौरान EMI स्थगन के बावजूद ब्याज वसूली पर वित्त मंत्रालय को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने यह आदेश भारतीय रिजर्व बैंक के उस जवाब के बाद दिया, जिसमें कर्ज अदायगी में स्थगन की अवधि पर ब्याज लेने से रोकने को बैंकों की वित्तीय स्थिति पर चोट पहुंचने की बात कही गई थी।

अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह चुनौतीपूर्ण समय है और यह एक गंभीर मुद्दा है क्योंकि जहां एक ओर ऋण का भुगतान स्थगित किया गया है तो दूसरी ओर कर्ज पर ब्याज लिया जा रहा है।

शीर्ष अदालत ने लोन लेने वाले लोगों के साथ आरबीआई के ऐसे व्यवहार पर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा, इस मामले में दो पहलू पर विचार होना है। पहला EMI मोरटेरियम पीरियड के दौरान कर्ज पर ब्याज नहीं वसूले जाने का मसला है और दूसरा इस ब्याज पर कोई ब्याज नहीं बसूले जाने का मुदृदा है।

“आरबीआई क्‍या पहले मीडिया को देती है जवाब’…

पीठ ने इस पर बेहद नाराजगी जताई कि सुप्रीम कोर्ट में आरबीआई का हलफनामा दायर होने से पहले ही यह मीडिया तक कैसे पहुंच गया। पीठ ने कहा कि आरबीआई क्‍या अदालत से पहले मीडिया में जवाब दाखिल करती है? दत्ता ने सवाल किया, ”क्या रिजर्व बैंक अपना जवाब पहले मीडिया में और फिर न्यायालय में दाखिल कर रहा है? उन्होंने कहा कि यह सारे मामले को सनसनीखेज बनाने का प्रयास है।  पीठ ने कहा कि यह बेहद निन्दनीय आचरण है और दुबारा ऐसा नहीं होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने 26 मई को शर्मा की याचिका पर केन्द्र और रिजर्व बैंक से जवाब मांगा था। 

आरबीआई ने उठाया था बैंकों के नुकसान का मुद्‌दा…

शीर्ष अदालत के आदेश पर आरबीआई ने वुधवार को हलफनामा दाखिल किया था, जिसमें उसने बैंकों को नुकसान का मुदुदा उठाया था। आरबीआई ने कहा था कि कर्ज अदायगी पर स्थगन देने के निर्णय केवल भुगतान दायित्वों को स्थगित करना है, इसे EMI छूट समझने की भूल नही की जानी चाहिए।भारतीय रिजर्व बैंक पहले ही कह चुका है कि बैंकों की माली हालत को जोखिम में डालते हुए
जबरन ब्याज माफ करना विवेकपूर्ण नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने EMI कर्ज की किस्त से राहत (मोरिटोरियम) के दौरान बैंक द्वारा कर्ज की किस्त पर ब्याज लेने के मामले को गंभीर मुद्दा कहा है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कर्ज की किस्त के साथ ब्याज भी माफ करने की मांग पर सुनवाई 12 जून तक टाल दी है।

पीठ भारतीय रिजर्व बैंक की 27 मार्च की अधिसूचना के उस अंश को असंवैधानिक घोषित करने के लिए गजेन्द्र शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमे ऋण स्थगन की अवधि में कर्ज की राशि पर ब्याज लिया जा रहा है। आगरा निवासी शर्मा ने ऋण स्थगन अवधि के दौरान की कर्ज की राशि के भुगतान पर ब्याज वसूल नहीं करने की राहत देने का सरकार और रिजर्व बैंक को निर्देश देने का अनुरोध किया है।

केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह इस संबंध में वित्त मंत्रालय का जवाब दाखिल करना चाहेंगे और इसके लिये उन्हें वक्‍त चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हम वित्त मंत्री और आला अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रास्ता तलाशते हैं. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का अनुरोध स्वीकार करते हुए इस मामले में वित्त मंत्रलय तथा आरबीआइ से जरूरी निर्देश लेने के लिए एक सप्ताह का समय दे दिया।

ये आदेश न्यायमूíत अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने किस्त के साथ ही मोरिटोरियम के दौरान ब्याज भी माफ करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिए।