भत्ते समाप्त होने से खफा कर्मचारियों पर उत्तर प्रदेश सरकार सख्त। निर्देश जारी। शासनादेश जारी। देखें।

भत्ते समाप्त होने से खफा कर्मचारियों पर उत्तर प्रदेश सरकार सख्त हो गयी है। कल दिनाँक 23 मई 2020 को उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव मुकुल सिंघल द्वारा इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किये गए जो इस प्रकार हैं। आदेश में कहा गया है कि धरना, साकेतिक प्रर्दशन, प्रदर्शन एवं हडताल में भाग लेने के कारण यदि संबंधित कार्मिक के द्वारा कार्य नहीं किया जाता है तो ऐसे कार्मिकों को “कार्य नहीं तो वेतन नहीं” के सिद्धांत के आधार पर संबंधित अवधि का वेतन भुगतान न किया जाए। साथ ही धरना , सांकेतिक प्रर्दशन , प्रदर्शन एवं हडताल में शामिल होने के उददेश्य से अवकाश मांगने वाले कार्मिकों का अवकाश स्वीकृत न किया जाए।कार्यालय आने वाले कार्मिकों को संरक्षण प्रदान किया जाए तथा व्यवधान डालने वाले कार्मिकों के विरूद्ध उपरोक्तानुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। कार्य बहिष्कार अथवा हडताल की स्थिति में अपने विभाग से संबंधित अत्यावश्यक सुविधायें बनाये रखे जाने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। किसी अधिकारी को हडताल की अवधि में अवकाश स्वीकृत न किया जाए।

केंद्रीय कर्मचारियों को लॉकडाउन के बाद भी करना पड़ेगा वर्क फ्रॉम होम।

नई दिल्ली। महामारी को देखते हुए केंद्रीय कर्मचारियों को भविष्य में अलग-अलग कामकाजी घंटों में काम करना पड़ सकता है। दफ्तर में उपस्थिति भीकम रह सकती है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने लॉकडाउन खत्म होने के बाद केंद्रीय कर्मियों के लिए ‘घर से काम करने के संबंध में रूपरेखा तैयार की है। इसमें कहा गया है कि विभाग अधिकारियों और कर्मचारियों को नीतिगत रूप से एक साल में 15 दिन के लिए घर से काम करने का विकल्प मुहैया करा सकता है।
केंद्रीय कर्मचारी करीब 48.34 लाख हैं। सभी विभागों को भेजी गई विज्ञप्ति में डीओपीटी ने कहा है, कोविड-19 ने सामाजिक दूरी बनाए रखने को कई मंत्रालयों के लिए घर से काम करना अनिवार्य कर दिया है। कई विभागों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-कार्यालय सुविधाओं का लाभ उठाकर लॉकडाउन के दौरान कोरोना से निपटने में बेहतरीन नतीजे दिए व सफलतापूर्वक कामकाज किया। यह अपनी तरह का पहला अनुभव था। मंत्रालय ने कहा, ऐसी संभावना है कि निकट भविष्य में केंद्रीय सचिवालय में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रहे। कार्यस्थल पर सामाजिक दूरी बनाए रखने को उन्हें लॉकडाउन के बाद घर से काम करना पड़े। नई मानक संचालन प्रक्रियाएं तय की गई हैं।

भत्तों की समाप्ति पर कर्मचारियों में उबाल , आंदोलन की चेतावनी।

लखनऊ राज्य कर्मचारी संगठनों ने कर्मचारियों, शिक्षकों और पुलिस को मिलने वाले भत्तों को समाप्त करने के फैसले पर आक्रोश व्यक्त किया है। साथ ही इस निर्णय के वापस न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वे वित्त विभाग के अधिकारियों की साजिश समझें। जिन्होंने अपनी पीठ थपथपाने के लिए सरकार से अकारण और अनावश्यक निर्णय कराया है, जिससे प्रदेश में कर्माचारी आंदोलित हों वातावरण अशांत हो।राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी व सेवानिवृत्त कर्मचारी व पेंशनर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरनाथ यादव ने कहा कि वित्त विभाग ने सरकार से अकारण और असमय कर्मचारी विरोधी यह फैसला कराया है।

परिषद के महामंत्री शिवबरन यादव ने कहा कि भत्तों के स्थगन से सरकार पर खर्च का बोझ कम हो गया था तो ऐसा फैसला कराकर कर्मचारियों का मनोबल गिराने का जरूरत नहीं थी। खासतौर से तब जब कर्मचारी इस सम जान हथेली पर रखकर सेवाएं दे रहा है। उस समय पुरस्कार की गह ऐसे फैसले होना कर्मचारियों को आक्रोशित करना है। अच्छा होगा कि सरकार कर्मचारियों को सड़क पर आने को मजबूर न करे। वहीं सुरेश रावत की अध्यक्षता वाली राज्य कर्मचारी संयुक परिषद के महामंत्री अतुल मिश्र ने कहा कि सभी कर्मचारी फैसले से निराश है ।सरकार जल्द अपना फैसला वापस ले अन्यथा 19 मई को समस्त प्रदेश कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

ACR की प्रविष्टियों को एक तय समयसीमा के अंदर कर्मचारी को अवगत कराएं – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने व्यवस्था  दी है कि कर्मचारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में दर्ज हर प्रविष्टि अच्छी, बुरी, ठीक-ठाक या बहुत अच्छी जो भी हो एक निश्चित समय के भीतर कर्मचारी को अवश्य बताई जानी चाहिए। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने एसीआर में दर्ज प्रविष्टियों के बारे में दो न्यायाधीशों को पीठ के विभिन्न फैसलों के भ्रम और विरोधाभास समाप्त करते हुए इस बारे में कानून तय कर दिया है। 

कर्मचारी एसीआर में दर्ज प्रविष्टि की जानकारी होने पर उसे सुधारने के लिए प्रयास कर सकता है और असंतुष्ट होने पर उसके खिलाफ ज्ञापन दे सकता है। दिनांक 12 दिसम्बर, 2006 को सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ न्यायमूर्ति एस॰बी॰ सिन्हा व मार्कंडेय काटजू ने एसीआर में दर्ज प्रविष्टियों की जानकारी कर्मचारी को देने के बारे में अगल-अलग फैसलों को देखते हुए कानून का प्रश्न विचार के लिए तीन न्यायाधीशों की बड़ी पीठ को भेज दिया था। 

न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा, मदन बी लोकुर और कुरियन जोसेफ की पीठ ने कानूनी प्रश्न तय करते हुए कहा कि एसीआर में दर्ज प्रत्येक प्रविष्टि एक निश्चित समय के भीतर अनिवार्य रूप से कर्मचारी को बताना कानूनी उचित है। 

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इससे तिहरे उद्देश्य की पूर्ति होगी। 

पहला, एसीआर में दर्ज प्रत्येक प्रविष्टि की जानकारी कर्मचारी को दिए जाने से वह अपनी एसीआर प्रविष्टि सुधारने के लिए ज्यादा परिश्रम से काम करेगा और बेहतर नतीजे देगा। 

दूसरा, हो सकता है कि कर्मचारी अपन एसीआर में दर्ज प्रविष्टि से संतुष्ट न हो। एसीआर प्रविष्टि के बारे में उसे जानकारी दिए जाने से वह दर्ज प्रविष्टि में सुधार के लिए अथॉरिटी के समक्ष ज्ञापन दे सकता है। 

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तीसरा, पहलू यह है कि कर्मचारी की एसीआर में दर्ज प्रविष्टि की जानकारी उसे दिए जाने से एसीआर में प्रविष्टि दर्ज करने के बारे में पारदर्शिता आएगी और व्यवस्था में नैसर्गिक न्याय का सिद्धांत बेहतर ढंग से लागू होगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने दो न्यायाधीशों द्वारा देवदत्त के मामले में दिए गए फैसले से सहमति जताई है जिसमें एसीआर में दर्ज हर प्रविष्टि कर्मचारी को बताने की बात कही गई है। कोर्ट ने कहा है कि इससे विपरीत नजरिया रखने वाले सत्यनारायण शुक्ला व के॰एम॰ मिश्रा के फैसलों में कानून की सही व्यवस्था नहीं दी गई है। देवदत्त के मामले में दो न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि एसीआर में दर्ज प्रविष्टियां कर्मचारी को बताई जानी चाहिए।

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केंद्र सरकार ने कर्मचारियों/पेंशनरों का महँगाई भत्ता वृद्धि पर जुलाई 2021 तक रोक लगाई

नई दिल्लीः देश के करोड़ों सरकारी कर्मचारियों को केंद्र सरकार ने झटका दे दिया है. केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता बढ़ाने पर रोक लगा दी है. कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट की वजह से ये फैसला लिया गया है. पहले से ही इस बात के संकेत मिलने लगे थे कि इस बार कर्मचारियों और पेंशनधारकों को महंगाई भत्ते के बढ़ने का फायदा नहीं दिया जाएगा । फैसले के तहत यह आदेश केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों और वेतनभोगियों पर लागू होगा.

वेतन संरक्षण देना सरकार का नीतिगत निर्णय – उo प्रo हाईकोर्ट


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा कर्मचारियों को दिया जाने वाला वेतन संरक्षण लाभ सरकार का नीतिगत निर्णय होता है अदालतों को इसमें हस्तक्षेप करने का सीमित अधिकार है। हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेज में नियुक्त एक प्रवक्ता की वेतन संरक्षण की मांग को खारिज करते हुए उनके हक में दिए एकल जज के आदेश से असहमति व्यक्त कर यूपी सरकार की विशेष अपील को मंजूर कर लिया। यह निर्णय हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विश्वनाथ सोमद्दर व न्यायमूर्ति डॉ वाई के श्रीवास्तव की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार द्वारा एकल जज के आदेश के खिलाफ दाखिल विशेष अपील को मंजूर करते हुए दिया है। एकल जज ने झांसी मेडिकल कॉलेज में नियुक्त प्रवक्ता डॉ. राज कमल सिंह की वेतन संरक्षण की मांग को को मंजूर कर लिया था, जिसके खिलाफ
सरकार ने विशेष अपील दो जजों के समक्ष दायर की थी।

उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय का संबंधित निर्णय देखें

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