उत्तर प्रदेश राज्याधीन सेवायों में तैनात अधिकारियों/कर्मचारियों की वर्ष 2019-20 के लिए ACR की समय सारणी का निर्धारण आदेश हुआ जारी।

अधिकारी/कर्मचारी 15 जून तक दे सकेंगे स्व मूल्यांकन रिपोर्ट।

लखनऊ। प्रदेश सरकार ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर अधिकारियों व कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि दर्ज किए जाने की समय सारिणी जारी कर दी है। स्व मूल्यांकन रिपोर्ट देने की अवधि 15 जून तक बढ़ा दी गई है। अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक मुकुल सिंघल ने इस संबंध  में दिशा निर्देश जारी कर दिया है। प्रदेश में सरकारी सेवाओं में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि दर्ज करने के लिए शासन स्तर से एक समय सारिणी तय है। कोविड महामारी के फैलाव व लॉकडाउन की वजह से प्रदेश में आवश्यक सेवाएं जारी रखने तथा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की लगातार व्यस्त है। शासन ने इस स्थिति में कर्मचारियों की गोपनीय प्रविष्टि दर्ज करने की समय सारिणी को संशोधित करने का फैसला किया है। 

अधिकारी स्वमूल्यांकन रिपोर्ट 15 जून तक दे देंगे। जहां प्रविष्टि दर्ज करने के लिए दो स्तर हैं, वहां प्रतिवेदक अधिकारी 15 अक्टूबर तक तथा समीक्षा अधिकारी 31  दिसंबर तक अपना मंतव्य देंगे। जिन अधिकारियों के मामले में प्रविष्टि अंकित करने के तीन स्तर हैं, वहां प्रतिवेदन, समीक्षा व स्वीकर्ता अधिकारी अपना मंतव्य क्रमशः 31 अगस्त, 15 अक्टूबर तथा 31 दिसंबर 2020 तक दे देंगे। 

मंडलीय व जिला स्तरीय अधिकारियों की प्रविष्टि अंकित करने के विशेष अधिकार के तहत मंडलायुक्त व जिलाधिकारी अपनी प्रविष्टियां 15 अक्टूबर तक देंगे। यदि संबंधित अधिकारी समय सारिणी के अनुसार अपना मंतव्य नहीं देते हैं तो उनके मंतव्य की प्रतीक्षा किए बगैर अगले स्तर के अधिकारी संबंधित प्रपत्र तलब कर प्रविष्टि अंकित करेंगे।

ACR की प्रविष्टियों को एक तय समयसीमा के अंदर कर्मचारी को अवगत कराएं – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने व्यवस्था  दी है कि कर्मचारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में दर्ज हर प्रविष्टि अच्छी, बुरी, ठीक-ठाक या बहुत अच्छी जो भी हो एक निश्चित समय के भीतर कर्मचारी को अवश्य बताई जानी चाहिए। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने एसीआर में दर्ज प्रविष्टियों के बारे में दो न्यायाधीशों को पीठ के विभिन्न फैसलों के भ्रम और विरोधाभास समाप्त करते हुए इस बारे में कानून तय कर दिया है। 

कर्मचारी एसीआर में दर्ज प्रविष्टि की जानकारी होने पर उसे सुधारने के लिए प्रयास कर सकता है और असंतुष्ट होने पर उसके खिलाफ ज्ञापन दे सकता है। दिनांक 12 दिसम्बर, 2006 को सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ न्यायमूर्ति एस॰बी॰ सिन्हा व मार्कंडेय काटजू ने एसीआर में दर्ज प्रविष्टियों की जानकारी कर्मचारी को देने के बारे में अगल-अलग फैसलों को देखते हुए कानून का प्रश्न विचार के लिए तीन न्यायाधीशों की बड़ी पीठ को भेज दिया था। 

न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा, मदन बी लोकुर और कुरियन जोसेफ की पीठ ने कानूनी प्रश्न तय करते हुए कहा कि एसीआर में दर्ज प्रत्येक प्रविष्टि एक निश्चित समय के भीतर अनिवार्य रूप से कर्मचारी को बताना कानूनी उचित है। 

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इससे तिहरे उद्देश्य की पूर्ति होगी। 

पहला, एसीआर में दर्ज प्रत्येक प्रविष्टि की जानकारी कर्मचारी को दिए जाने से वह अपनी एसीआर प्रविष्टि सुधारने के लिए ज्यादा परिश्रम से काम करेगा और बेहतर नतीजे देगा। 

दूसरा, हो सकता है कि कर्मचारी अपन एसीआर में दर्ज प्रविष्टि से संतुष्ट न हो। एसीआर प्रविष्टि के बारे में उसे जानकारी दिए जाने से वह दर्ज प्रविष्टि में सुधार के लिए अथॉरिटी के समक्ष ज्ञापन दे सकता है। 

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तीसरा, पहलू यह है कि कर्मचारी की एसीआर में दर्ज प्रविष्टि की जानकारी उसे दिए जाने से एसीआर में प्रविष्टि दर्ज करने के बारे में पारदर्शिता आएगी और व्यवस्था में नैसर्गिक न्याय का सिद्धांत बेहतर ढंग से लागू होगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने दो न्यायाधीशों द्वारा देवदत्त के मामले में दिए गए फैसले से सहमति जताई है जिसमें एसीआर में दर्ज हर प्रविष्टि कर्मचारी को बताने की बात कही गई है। कोर्ट ने कहा है कि इससे विपरीत नजरिया रखने वाले सत्यनारायण शुक्ला व के॰एम॰ मिश्रा के फैसलों में कानून की सही व्यवस्था नहीं दी गई है। देवदत्त के मामले में दो न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि एसीआर में दर्ज प्रविष्टियां कर्मचारी को बताई जानी चाहिए।

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