भत्तों में केंद्र से समानता दे दें तो कोई विरोध ही नहीं।भत्तों में कटौती के विरोध में आंदोलन।

लखनऊ। कर्मचारी-शिक्षक समन्वय समिति ने प्रदेश में भत्तों की कटौती को अनुचित और कर्मचारियों-शिक्षकों के उत्पीड़न का जरिया बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। समिति ने भत्तों की कटौती के तर्क को आधा सच बताते हुए मुख्यमंत्री से भत्तों की कटौती के फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया है। साथ ही कहा कि सरकार यदि भत्तों में केंद्र से समानता देना चाहती है तो वह इस नियम को पूरी तरह लागू कर दें कर्मचारी-शिक्षकों को कोई विरोध नहीं है। समिति के समन्वयक अमरनाथ यादव और अन्य कई संगठनों के प्रमुखों की तरफ से लिखे गए इस पत्र में तर्क दिया गया है कि यह सत्य नहीं है कि केंद्र में नगर प्रतिकर भत्ता सहित प्रदेश में खत्म किए गए अन्य भत्ते नहीं दिए जा रहे हैं। यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने यदि केंद्र से समानता देने के लिए इन भत्तों को खत्म किया है तो वह परिवहन भत्ता सहित केंद्र में दिए जा रहे अन्य भत्तों को दे दिया जाए तो कोई विरोध ही नहीं है।

भत्तों में कटौती के विरोध में आंदोलन

इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन (इप्सेफ) के आह्वान पर राजधानी के विभिन्न चिकित्सालय कर्मियों व सरकारी विभागों में काम करने वाले राज्य कर्मचारियों ने भत्तों को फ्रीज किये जाने के विरोध में मंगलवार को काला फीता बांधकर विरोध जताया। राष्ट्रीय अध्यक्ष वीपी मिश्र और महामंत्री प्रेम चंद्र ने कहा कि भत्तों की कटौती के विरोध में केंद्रीय एवं राज्य के कर्मचारियों ने काला फीता बांधकर सांकेतिक विरोध प्रकट किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन भी भेजा गया। मांग की है कि भत्तों की कटौती को वापस किया जाए। दावा किया कि प्रदेश के तमाम जिलों में भी आंदोलन किया गया। परिषद के महामंत्री वह इप्सेफ के राष्ट्रीय सचिव अतुल मिश्रा ने बताया कि परिषद के संबंध संगठन के प्रांतीय पदाधिकारियों ने बलरामपुर चिकित्सालय में एकत्रित होकर इप्सेफ राष्ट्रीय अध्यक्ष वीपी मिश्र के नेतृत्व में काला फीता बांधकर विरोध प्रदर्शन किया।

वहीं भत्तों की कटौती के विरोध में कर्मचारी-शिक्षक समन्वय समिति और पेंशनर्स एसोसिएशन ने सोमवार को कर्मचारी नेता बीएएन सिंह की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि के साथ आंदोलन की शुरुआत कर दी है।