830 राजकीय चिकित्सकों का प्रमोशन महानिदेशालय में लटका।

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लखनऊ । सरकारी अस्पतालों में तैनात सैकड़ों एलोपैथिक चिकित्सकों का प्रमोशन फंस गया है। एलोपैथिक चिकित्सको के लेवल 3 से 4 में प्रोमोशन का मामला है।एलोपैथिक चिकित्सको की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियां (एसीआर) स्वास्थ्य महानिदेशालय में नहीं पहुंची हैं ।एलोपैथिक चिकित्सको का दावा है कि ऑनलाइन एसीआर भरवाया गया था । शासन की सख्ती के बाद अब महानिदेशालय ने फिर से सभी मंडलीय अफसरों, सीएमओ और अस्पतालों के सीएमएस को पत्र भेजकर 5 दिन के अंदर एसीआर मुहैया कराने को कहा है। ऐसे में ऑनलाइन भराई गई एसीआर कहां अटक गए इसकी जानकारी अफसरों को नहीं है। प्रदेश में लेवल 3 के 830 डॉक्टरों की प्रोन्नति होनी है । डॉक्टरों को समय पर प्रोन्नति मिल सके इसके लिए नौकरी से जुड़े दस्तावेजों का डिजिटल करने का फैसला लिया गया था । इस दिशा में काम भी हुआ डॉक्टरों ने 2018-19 में ऑनलाइन एसीआर फॉर्म भरे ।

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प्रमोशन ना होने से जूनियर हुए

18 मई को स्वास्थ्य महानिदेशालय ने एक बार फिर से सभी की एसीआर जिम्मेदार अधिकारियों से मांगी है ताकि शासन को प्रोन्नति के लिए डॉक्टरों की सूची व दस्तावेज उपलब्ध कराए जा सकें । वर्ष 1999 में करीब 1000 डॉक्टरों ने नौकरी ज्वाइन की थी इसमें से 400 डॉक्टरों की प्रोन्नति जनवरी 2017 में हो गई जबकि बाकी कि प्रोन्नति अभी तक नहीं हो पाई है। डॉक्टरों का कहना है कि वह अपने साथ नौकरी ज्वाइन करने वालों से कनिष्ठ हो गए हैं। मामले में नए सिरे से शुरू होने के बाद काफी दिनों तक यह प्रक्रिया चलती रहेगी। तब तक के लिए मामला अटक गया है। वहीं दूसरी ओर अधिकारियों का कहना है कि बिना एसीआर डॉक्टरों की प्रोन्नति संभव नहीं है जिम्मेदार अधिकारियों को एसीआर महानिदेशालय स्थित गोपन विभाग में 5 दिन के भीतर उपलब्ध कराने हेतु आदेशित किया गया है । डॉक्टरों का कहना है कि प्रोन्नति में देरी होने से लगभग हर महीने उनको ₹25000 का नुकसान होगा । उनका कहना है कि कोरोना मरीजों के इलाज में जुटे डॉक्टरों में प्रोन्नति के अभाव में निराशा हो रही है डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों की सेवा पूरी लगन से कर रहे हैं इसके बावजूद डॉक्टरों के हितों के बारे में अफसरों द्वारा लापरवाही हो रही है अधिकारियों की सुस्ती के कारण खामियाजा एलोपैथिक चिकित्सको को भुगतना पड़ रहा है।

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