पदोन्नति/उच्च वेतनमान के उपरांत वेतन निर्धारण प्रक्रिया में संशोधन का स्पष्टीकरण आदेश जारी।

लखनऊ। प्रदेश सरकार ने एक जनवरी 2016 या उसके बाद पदोन्नति प्राप्त करने वाले या एसीपी के अंतर्गत वितीय स्तरोन्नयन प्राप्त करने वाले कर्मियों के वेतन निर्धारणकी व्यवस्था में कुछ बदलाव किया है। इसकी वजह से ऐसे कर्मियों को वेतन निर्धारण का विकल्प फिर से चुनने का मौका दिया गया है।कर्मचारी एक महीने के अंदर विकल्प दे सकते हैं। अपर मुख्यस चिव वित संजीव मितल ने कहा है।कि यदि किसी कर्मचारी की एक जनवरी अथवा एक जुलाई को साधारण वेतनमान से उच्च वेतनमान में पदोन्नत होती है। अथवा एसीपी नियमों में वितीय स्तरोन्नयन प्राप्त होता है। साथ ही वह तिथि उसके निचले पे मैट्रिक्स लेवल में उसकी सामान्य वेतन वृद्धि की तिथि भी है तथा उसका वेतन निर्धारण इसी तिथि को किया जाता है तो कर्मी को अगली वेतन वृद्धि अगली एक जुलाई अथवा एक जनवरी को मिलेगी।

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उसे इस बीच 6 माह की अर्हकारी सेवा अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी। ऐसे कर्मी को अगली वेतन वृद्धि एक वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद मिलेगी। इसी तरह यदि कर्मी की एक जनवरी व एक जुलाई से भिन्न किसी अन्य तिथि में पदोन्नति होती है तो उसकी भी प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। यदि ऐसे कर्मी निचले पे मैट्रिक्स लेवल में अगली वेतन वृद्धि की देयता की तिथि से वेतन निर्धारण विकल्प देता है तो पदोन्नति व एसीपी स्वीकृत होने की तिथि को उसका वेतन निर्धारण उसे निचले पे मैट्रिक्स लेवल में प्राप्त हो रहे मूल वेतन से अगले लेवल में तय कर दिया जाएगा। यह उसे विकल्प की तिथि तक प्राप्त होगा। विकल्प की तिथि को सबसे पहले उसे निचले पे मैट्रिक्स लेवल में सामान्य वार्षिक वेतन वृद्धि जाएगी। इसके बाद उसका वेतन निर्धारण किया जाएगा। ऐसे कर्मियों
को अगली वेतन वृद्धि 6 माह की सरकारी सेवा पूरी करने के बाद अगली एक जनवरी अथवा एक जुलाई को दी जाएगी। इसके बाद अगली वेतन वृद्धि एक वर्ष की सेवा पूर्ण होने के बाद मिलेगी।

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